कांग्रेस में नई ऊर्जा भर गई युवाओं की गूंज

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम छात्रों की गूंज में युवाओं और छात्रों की भारी भागीदारी ने कांग्रेस में नई जान फूंकने के संकेत दिए हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं के साथ उनके अभिभावक भी मौजूद रहे, जिससे आयोजन स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय बाद कांग्रेस के कार्यक्रम में इस तरह युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में आए लोगों ने कहा कि यह भीड़ केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भीतर बढ़ती उम्मीद और बदलाव की चाह को दर्शाती है। कार्यक्रम स्थल पर दोपहर बाद से ही युवाओं का पहुंचना शुरू हो गया था और शाम करीब साढ़े सात बजे तक छात्र-छात्राएं अपने साथियों के साथ समूहों में पहुंचे, वहीं कई अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।अभिभावकों ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दे अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवारों की चिंता का विषय बन चुके हैं। वहीं, युवाओं ने खुलकर बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, नकल, धांधली, सीमित अवसर और निजी क्षेत्र में कम वेतन जैसे मुद्दों पर बात रखी। कई युवाओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज अब नीति नियंताओं तक पहुंचेगी।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम छात्रों की गूंज में युवाओं और छात्रों की भारी भागीदारी ने कांग्रेस में नई जान फूंकने के संकेत दिए हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं के साथ उनके अभिभावक भी मौजूद रहे, जिससे आयोजन स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय बाद कांग्रेस के कार्यक्रम में इस तरह युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में आए लोगों ने कहा कि यह भीड़ केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भीतर बढ़ती उम्मीद और बदलाव की चाह को दर्शाती है। कार्यक्रम स्थल पर दोपहर बाद से ही युवाओं का पहुंचना शुरू हो गया था और शाम करीब साढ़े सात बजे तक छात्र-छात्राएं अपने साथियों के साथ समूहों में पहुंचे, वहीं कई अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।अभिभावकों ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दे अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवारों की चिंता का विषय बन चुके हैं। वहीं, युवाओं ने खुलकर बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, नकल, धांधली, सीमित अवसर और निजी क्षेत्र में कम वेतन जैसे मुद्दों पर बात रखी। कई युवाओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज अब नीति नियंताओं तक पहुंचेगी।




