उत्तराखंड में पांच से कम आयु के बच्चों में 3.4% बढ़ा, सेहत का नया फॉर्मूला, 5-2-1-0 नियम

उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मोटापा 2.1 से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया। 5-2-1-0 नियम से बचाव मिल सकता है।
आधुनिक युग की भागदौड़ और स्वाद के फेर में हमने अपनी सेहत को दांव पर लगा दिया है। आज मोटापा सिर्फ एक शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि एक अदृश्य महामारी बन चुका है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। यह साइलेंट किलर भविष्य में मधुमेह और हृदय रोगों जैसी बड़ी चुनौतियों का द्वार खोल रहा है। लेकिन घबराएं नहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए 5-2-1-0 का एक मंत्र दिया है, जो आपकी जीवनशैली को फिर से ऊर्जावान बना सकता है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की उत्तराखंड शाखा के सचिव व हिमालयन अस्पताल के बाल रोग विभाग में तैनात डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि मोटापा अब केवल सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिस पर समय रहते नियंत्रण आवश्यक है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की उत्तराखंड शाखा के सचिव व हिमालयन अस्पताल के बाल रोग विभाग में तैनात डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि मोटापा अब केवल सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिस पर समय रहते नियंत्रण आवश्यक है।
अभिभावकों की भूमिका अहम
डॉ. राकेश कहते हैं कि बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। घर में संतुलित और पौष्टिक भोजन, नियमित दिनचर्या और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देकर मोटापे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। विश्व मोटापा दिवस का उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ी को मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।




