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उत्तराखंड

राहुल गांधी बोले-रेस्टोरेंट जैसा देश में पेपर लीक का मेन्यू कार्ड, मंच पर रो पड़े रिया थापा के पिता

देहरादून में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के मंच से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक का सिस्टम रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड जैसा हो गया है, जहां हर पेपर का रेट तय है। कार्यक्रम के दौरान नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाली रिया थापा के पिता अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए मंच पर भावुक हो गए।देश में पेपर लीक का मैन्यू कार्ड रेस्टोरेंट की तरह है। यहां हर पेपर का रेट तय है। पैसा दो और पेपर लो। छात्रों की गूंज कार्यक्रम में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि पेपर कराने की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए, निजी कंपनियों को नहीं। इस दौरान मंच पर जहां अभ्यर्थियों ने अपना पेपर लीक का दर्द साझा किया तो वहीं नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाली देहरादून की रिया थापा के पिता मंच पर फफक पड़े।शुक्रवार को दोपहर करीब ढाई बजे देहरादून हवाई अड्डे पहुंचे राहुल गांधी ने सबसे पहले दिवंगत कांग्रेस नेता अमर मेहता के घर पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद उन्होंने एक निजी होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक ली। शाम को रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में पेपर लीक प्रकरणों पर संवाद किया।करीब एक घंटे के संवाद में राहुल गांधी ने कहा कि देश में पेपर लीक का पूरा मेन्यू है। इसमें नीट का पेपर 40 लाख रुपये, आईआईटी का पेपर 15 लाख रुपये, उत्तराखंड पटवारी भर्ती का पेपर 15 लाख रुपये, बिहार की बेसिक शिक्षक भर्ती का पेपर 10 लाख और सब इंस्पेक्टर की भर्ती का पेपर 25 लाख रुपये में बेचा जाता है। अगर आप भ्रष्ट हैं। पेपर लीक में रुचि रखते हैं तो पैसा देकर आपके मोबाइल पर माफिया पेपर उपलब्ध करा देते हैं। लेकिन इससे देश के 99 फीसदी उन मध्यम वर्ग के बच्चों का हक मारा जाता है, जिनका परिवार बच्चे की तैयारी पर नौ लाख रुपये तक का खर्च करता है।राहुल गांधी ने कहा कि देश में युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार के पांच दरवाजे हैं। इनमें पहला विनिर्माण, दूसरा उद्यमिता, तीसरा कॉर्पोरेट, चौथा निजी क्षेत्र और पांचवां सरकारी नौकरी का है। उन्होंने कहा, चारों दरवाजे नौकरी के लिए लगभग बंद हैं। पांचवां सरकारी नौकरी का खुला है लेकिन इसमें मेहनत और पारदर्शिता से एंट्री नहीं मिलती। इसके बजाए पेपर लीक वाले दरवाजे से एंट्री दी जाती है।

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