Gen Z का धर्मपथ: कंधों पर कांवड़, दिखा संयम और अनुशासन, आस्था के साथ थामे हैं संस्कारों की डोर, तस्वीरें

कांवड़ के कठिन सफर में नई पीढ़ी भी पीछे नहीं है। बढ़ते कदमों में जोश है, कंधों पर कांवड़ और आस्था के साथ संस्कारों की डोर थामे नई पीढ़ी इस यात्रा का हिस्सा बन रही है। पैरों में घुंघरू, तन पर भगवा और जुबां पर ‘बम भोले’। कांवड़िए संयम और अनुशासन की मिसाल पेश कर रहे हैं।कांवड़ यात्रा…आस्था, अनुशासन, त्याग और समर्पण। कई किलोमीटर की पैदल यात्रा, भीषण गर्मी हो या बारिश। तप, व्रत और संयम की इस कठिन परीक्षा से हर कांवड़िया गुजर रहा है। लेकिन खास बात यह है कि इस परीक्षा में नई पीढ़ी जिसे आज कि नई भाषा में ‘जेन जी’ कहा जाता है, वो भी पीछे नहीं है। बदलते दौर में पीढ़ियां भले बदल रही हों, लेकिन कांवड़ यात्रा के जरिए परंपरा और संस्कार की यह डोर नई पीढ़ी तक भी पहुंच रही है।हरिद्वार की कांवड़ यात्रा में महिला पुरुष और बुजुर्गो श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ आस्था की इस राह पर कदम बढ़ती नजर आई। सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय मानी जाने वाली जेन जी भगवा वस्त्र पहनकर, कई-कई किलोमीटर नंगे पांव चलकर, कंधों पर कांवड़, होंठों पर ‘बोल बम’ के जय घोष के साथ भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था जाहिर करती दिखीं। इनकी कहानियों में एक बात सामने आई की कांवड़ का भार उठाते-उठाते ये पीढ़ी कहीं न कहीं अनुशासन, संयम और संकल्प का अर्थ भी समझ रही हैं।हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बीच 16 साल का भरत भी भोलेनाथ की भक्ति में नजर आया। दिल्ली से आए भरत की यह चौथी कांवड़ यात्रा है। इससे पहले वह परिवार के साथ कांवड़ यात्रा पर आया है, लेकिन तब कांवड़ उसके पिता उठाते थे। इस बार पिता की तबीयत खराब है, तो उनकी जगह भरत ने कांवड़ उठाने का संकल्प लिया है। कांवड़ उठाने से पहले भरत हरिद्वार के मंदिरों में दर्शन कर रहा है। चेहरे पर थकान और पसीने की बूंदें साफ नजर आती हैं, लेकिन भक्ति का भाव कम नहीं हुआ। भरत का कहना है कि उसके पिता ने हमेशा परिवार के लिए कष्ट उठाए हैं। अब वह भोलेनाथ से बस यही प्रार्थना कर रहा है कि उसके पिता के सारे कष्ट दूर हों और वह जल्द स्वस्थ हो जाएं। परिवार की सुख-शांति के लिए भरत इस बार अपने कंधों पर कांवड़ लेकर निकला है।




