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उत्तराखंड

डोईवाला से मैदान में उतरने की तैयारी में कर्नल कोठियाल, बोले-सैन्य बहुल होने के कारण इस सीट को चुना

भाजपा नेता व पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल डोईवाला से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सैन्य बहुल होने के कारण उन्होंने इस सीट को चुना है।भाजपा नेता व पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) ने आगामी विधानसभा चुनाव के रण में उतरने के लिए डोईवाला सीट को चुना है। सैन्य बहुल होने के उनकी इस सीट ज्यादा उम्मीदें हैं। हालांकि चुनाव के लिए अभी टिकट तय नहीं है लेकिन कोठियाल ने तैयारी तेज कर दी है।अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम पर साक्षात्कार में कर्नल कोठियाल ने राजनीतिक व सैनिकों के मुद्दों पर पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, भाजपा में बड़ा अच्छा सिस्टम है कि क्षमता और आवश्यकता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाती है। मुझे भी यह जताना है कि मैं राजनीतिक तरीके से जिम्मेदारी लेने के लिए इच्छुक हूं।इसके लिए मुझे कहीं न कहीं से तैयारी करनी थी, तो मैंने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र को चुना है। इस सीट पर फौजियों की अधिक संख्या है, यूथ फाउंडेशन से प्रशिक्षण लेकर यहां से 1450 युवा सेना में शामिल हुए हैं। मैंने तैयारी शुरू कर दी है, आगे पार्टी जैसा उचित समझेगी, उस पर काम करेंगे।विबताया कि केदारनाथ पुनर्निर्माण योजना के दौरान कुछ अभिभावक उनके पास आकर बोलने लगे कि उनके बच्चों को फौज में भर्ती करा दीजिए। तब उन्होंने यूथ फाउंडेशन का गठन कर सेना में भर्ती के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज 15 से 16 हजार युवा सेना में हैं। कहा कि अग्निवीर योजना भारतीय सेना का फैसला है, जो सोच-समझकर लिया गया है लेकिन कुछ लोगों ने इस योजना के बारे में भ्रांतियां फैलाई हैं।
इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की और चार साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को रोजगार दिलाने का अनुरोध किया। कोठियाल का कहना है यदि प्रशिक्षण और अच्छा अनुभव लेकर आ रहे अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों या अन्य दूसरे विभागों में नौकरी का अवसर दिया जाए तो इससे भ्रांतियां खत्म होंगी। सरकार ने इनके रोजगार के लिए अग्निवीर रोजगार सेल गठित कर दिया है।पहाड़ और मैदान के सवाल पर कर्नल कोठियाल ने कहा कि मेरे लिए पहाड़ पहले है। वहीं, जिंदगी के सबसे मुश्किल फैसले के बारे में पूछे जाने पर बताया कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद यह निर्णय लिया कि सेना में मिले अनुभव को समाज की सेवा में लगाऊंगा लेकिन शुरुआत में माहौल में जो बदलाव दिखा उससे एक बार को ऐसा भी लगा कि उनका यह निर्णय सही भी है या नहीं, लेकिन बाद में सब ठीक होता चला गया।

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