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उत्तराखंड

राजाजी टाइगर रिजर्व: सात हाथियों की मार्मिक कहानियां…जगाई नई उम्मीद, चिल्ला जोन में शुरू हो पाई हाथी सफारी

राजाजी टाइगर रिजर्व के चिल्ला जोन में हाथी सफारी की शुरुआत ने न सिर्फ पर्यटन के एक नए अध्याय को खोला है, बल्कि यह उस मानवीय संवेदना और संरक्षण-भावना की भी मिसाल है, जिसने कई संघर्षग्रस्त, घायल या अनाथ हाथियों को नया जीवन दिया है। यह सिर्फ पर्यटन की एक विधा नहीं बल्कि सह अस्तित्व की उम्मीद जगाती सात हाथियों की मार्मिक कहानी भी है।चिल्ला हाथी शिविर इस समय सात रेस्क्यू हाथियों का घर है। हर एक की अपनी अनोखी, भावुक और प्रेरक कहानी, जो बताती है कि धैर्य, करुणा और देखभाल किसी भी जीवन को बदल सकती है। इस वर्ष चिल्ला पर्यटन जोन में इन्ही हाथियों के साथ हाथी सफारी को पुनः आरंभ किया गया है, जिसका संचालन राधा व रंगीली कर रही हैं।राधासबसे वरिष्ठ हथिनी राधा शिविर की मातृशक्ति मानी जाती है। दिल्ली जू से लाई गई यह 18 वर्षीय हथिनी आज 35 की होकर भी उसी सहजता से अपने झुंड के छोटे–बड़े सदस्यों की देखभाल करती है। रानी, जॉनी, सुल्तान और अब नन्हे कमल जैसे गज शिशुओं को उसने अपनी मां की ममता से पाला। जिस तरह वह जंगल की सैर पर सबसे आगे चलकर दल को दिशा देती है, वही नेतृत्व उसे सफारी की मुख्य हथिनियों में शामिल करता है।

सबसे मार्मिक कहानी राजा की है। वह हाथी जिसने अपने जीवन की शुरुआत संघर्ष और अस्थिरता में देखी। वर्ष 2018 में राजा मानव–हाथी संघर्ष का हिस्सा बना और उसे पकड़कर चिल्ला लाया गया। कई महीनों के धैर्य, प्रशिक्षण और स्नेह ने उसके भीतर के तनाव को शांत किया। राजा आज उतना ही शांत, भरोसेमंद और समझदार है, मानसून में जब जंगल के रास्ते डूब जाते हैं, वही स्टाफ को अपने ऊपर बैठाकर गश्त कराता है और कई बार जंगली झुंडों को रास्ता दिखाता है।

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