उत्तराखंड पुलिस का सिपाही पहुंचा जंतर मंतर, युवाओं के आंदोलन में लिया हिस्सा, IG ने कहा-सस्पेंड था

जंतर मंतर पहुंचे उत्तराखंड पुलिस के सिपाही ने कहा कि सैकड़ों सिपाही उत्तराखंड में नौकरी से इस्तीफा देकर आंदोलन में आने को तैयार हैं।उत्तराखंड पुलिस का निलंबित सिपाही शेर सिंह वर्दी पहनकर छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने दिल्ली में जंतर मंतर तक पहुंच गया। वहां उसने कहा कि उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर परचून की दुकानों पर मिलते हैं। शेर सिंह यहीं नहीं रुका, उसने कहा कि दिल्ली में लाठीचार्ज के बाद उसका मन किया कि वह एके-47 उठा ले। दूसरी ओर सिपाही की इस हरकत के बाद महकमे ने संज्ञान लिया। जांच में पता चला कि वह 28 जून से तैनाती जिले पिथौरागढ़ से बिना बताए गायब है। उसे 20 जुलाई को ही निलंबित कर दिया गया है।दिल्ली में बयानबाजी करते हुए शेर सिंह का वीडियो शुक्रवार को दोपहर में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। उसने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को सुरक्षा का भरोसा देते हुए कहा कि उत्तराखंड में सैकड़ों सिपाही ऐसे हैं जो नौकरी छोड़ने के लिए तैयार हैं। वह भी इस्तीफा देकर यहां आया है। उसने कहा कि जब 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया तो वह उत्तराखंड में भ्रष्ट नेताओं की सुरक्षा में तैनात था।बयानबाजी के दौरान उसने कई और भी आपत्तिजनक बातें कहीं जिससे पुलिस महकमे में खलबली मच गई। सिपाही के बारे में जानकारी करने के लिए अफसरों के फोन बजने लगे। इस बीच पता चला कि सिपाही किसी की सुरक्षा में तैनात नहीं था बल्कि वह 28 जून से पिथौरागढ़ जिले से बिना अफसरों को बताए गायब हो गया था।आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने बताया कि कांस्टेबल 28 जून से पिथाैरागढ़ से अनुपस्थित था। इसके लिए उसे नोटिस दिया गया था। जिसके बाबद उसे 20 जुलाई को सस्पेंड कर दिया गया था। निलंबित कांस्टेबल का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। इसका एक अन्य साथी प्रवीण बाल्मिकी जैसे कुख्यात के साथ मिलकर गतिविधियों में संलिप्त थे। लोगों को डरा धमकाकर लोगों की जमीन हड़पते थे। हरिद्वार में मामला भी दर्ज किया गया। ये कई महीने जेल भी रहा। इस संबंध में पहले से ही कार्रवाई चल रही थी। अब जिस तरह के आरोप कांस्टेबल द्वारा लगाए जा रहे हैं, इस पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।




