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उत्तराखंड

दावानल, सिस्टम के दावे धुआं-धुआं, प्रदेश में सबसे अधिक वनाग्नि से प्रभावित होने वाला जिला पौड़ी

प्रदेश में दूसरा सबसे अधिक वनाग्नि से प्रभावित होने वाला जिला पौड़ी गढ़वाल है। तीन वर्षों में 325 घटनाएं हुईं। सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल को नुकसान पहुंचा है।प्रदेश में जंगल की आग की घटनाएं एक चुनौती रही हैं। वनाग्नि नियंत्रण के लिए संसाधनों को बढ़ाने के तमाम दावों के बीच जंगल की आग की घटनाएं लगातार बढ़ हो रही हैं। इससे पौड़ी जिला भी अछूता नहीं है। हालात ये हैं कि बीते दो वर्षों से राज्य में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं इसी जिले में रिपोर्ट हो रही हैं।प्रदेश में जंगल की आग की घटनाएं एक चुनौती रही हैं। वनाग्नि नियंत्रण के लिए संसाधनों को बढ़ाने के तमाम दावों के बीच जंगल की आग की घटनाएं लगातार बढ़ हो रही हैं। इससे पौड़ी जिला भी अछूता नहीं है। हालात ये हैं कि बीते दो वर्षों से राज्य में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं इसी जिले में रिपोर्ट हो रही हैं।पौड़ी जिले में तीन 2023 से 2025 तक वनाग्नि के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2023 में प्रदेश में पौड़ी जिला तीसरे स्थान पर था, जहां पर सबसे अधिक वनाग्नि की घटना हुईं। 2024 और 2025 में यह दूसरे नंबर पर आ गया है। तीन वर्ष में 325 घटनाएं हुईं, 425 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल में जैव विविधता प्रभावित हुई है। वनाग्नि के मद्देनजर सिविल सोयम पौड़ी, गढ़वाल वन प्रभाग पौड़ी और नागदेव रेंज सबसे अधिक संवेदनशील है। इस वर्ष भी 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हुआ है, इसके बाद से सिविल सोयम प्रभाग में 19 घटनाओं में करीब 11 हेक्टेयर और गढ़वाल वन प्रभाग में आठ घटनाओं में 21 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है। यहां पर अप्रैल के समय तुलनात्मक तौर पर घटनाएं अधिक हुईं।

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