बेटियों का पहला सैनिक स्कूल खोलने में सिस्टम का अड़ंगा, शिक्षा निदेशक ने सभी सीईओ को दिए निर्देश

सैन्य परंपरा के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में बेटियों को भी सैन्य शिक्षा से जोड़ने की पहल फिलहाल अटकी हुई है। बालिकाओं के लिए पहला सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। अब शिक्षा विभाग ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों को नए सिरे से निर्देश जारी किए हैं।सैन्य बहुल प्रदेश उत्तराखंड में बेटियों की सेना में भागीदारी बढ़ाने के लिए बालिका सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव था। इस संबंध में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद सिस्टम ने इस प्रस्ताव को अब तक लटका रखा है। जिससे बेटियों के लिए पहला सैनिक स्कूल नहीं खुल पा रहा है। यदि यह स्कूल खुल जाता तो बेटियों को सैन्य शिक्षा के अधिक अवसर मिलते। अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है।प्रदेश के शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने एक जुलाई 2022 को सचिव विद्यालयी शिक्षा को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के लिखित में निर्देश दिए थे। जिस पर 11 जुलाई 2022 को शासन ने शिक्षा महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को पत्र लिखकर राज्य में बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए सुस्पष्ट प्रस्ताव मांगा लेकिन शिक्षा मंत्री और शासन के आदेश के बाद भी शिक्षा महानिदेशालय से इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को नहीं भेजा गया।हैरानी की बात यह है कि इस प्रकरण के अब चार साल बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को बालिका एवं अन्य सैनिक स्कूलों की स्थापना के लिए कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं। शिक्षा निदेशक ने 21 जुलाई 2026 को दिए निर्देश में कहा है कि शासन ने इस मामले में जिले की आवश्यकता के अनुरूप कार्रवाई की अपेक्षा की है।राज्यकर विभाग से सेवानिवृत्त ज्वाइंट कमिश्नर एसपी नौटियाल बताते हैं कि उत्तराखंड में बालिका सैनिक स्कूल खोलने के मामले में जिस तरह से शासन और विभाग पिछले कुछ वर्षों से प्रस्ताव-प्रस्ताव खेल रहा है। इससे उसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वह बताते हैं कि बेटियां हर क्षेत्र में बराबरी की ओर बढ़ रही हैं इसके बावजूद सेना में अफसर बेटियां चार प्रतिशत से कम हैं। यदि बालिका सैनिक स्कूल उत्तराखंड में खुलता तो इससे बेटियों की सेना में भागीदारी बढ़ती।
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