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सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर से ऐसे कर सकते हैं बचाव, पढ़ें विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह

कैंसर से बचाव के लिए फैमिली हिस्ट्री पर भी ध्यान देना होगा। कैंसर होने का एक कारण जेनेटिक म्यूटेशन भी है। अगर नियमित जांच करवाएं तो कैंसर से बचाव हो सकता है।

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) सबसे अधिक होता है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन और पैप स्मीयर टेस्ट जरूरी है। ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए शीशे के सामने स्वयं परीक्षण करें। ओवेरियन कैंसर से बचाव के लिए हॉर्मोनल थेरेपी डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

पटेल नगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में ‘कैंसर से बचाव’ विषय पर अपराजिता कार्यक्रम में ये बातें दून अस्पताल के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दौलत सिंह ने महिलाओं को ये सावधानियां और उपाय बताए। बताया कि कैंसर से बचाव के लिए फैमिली हिस्ट्री पर भी ध्यान देना होगा। कैंसर होने का एक कारण जेनेटिक म्यूटेशन भी है। अगर नियमित जांच करवाएं तो कैंसर से बचाव हो सकता है। दून अस्पताल में कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी, टारगेट थेरेपी और इम्यूनो थेरेपी से किया जा रहा है। डॉक्टर ने कार्यक्रम में महिलाओं के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान पटेलनगर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज की छात्राएं और शिक्षिका भी मौजूद रहीं।

इस स्थिति में खतरा अधिक
दून अस्पताल के कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर दौलत सिंह ने बताया, यदि किसी लड़की में पीरियड की शुरुआत 13 साल की उम्र से पहले हो जाती है तो वह लड़की हाई रिस्क में है। वहीं, 45 साल की उम्र के बाद मीनोपॉज हो रहा है तब भी हाई रिस्क है। केमिकलयुक्त खाद्य पदार्थ और सब्जियों का सेवन भी कैंसर होने का कारण बन रहा है।

‘नौ से 14 साल तक की बच्चियों को लगवाएं एचपीवी वैक्सीन’
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन नौ से 14 साल की उम्र की लड़कियों को लगवा लेनी चाहिए। यह वैक्सीन सेक्सुअली एक्टिव होने से पहले लगवाना अधिक फायदेमंद होता है। फिलहाल, यह वैक्सीन निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। कैंसर की जांच और जानकारी के लिए दून अस्पताल के कैंसर रोग विभाग की ओपीडी में संपर्क किया जा सकता है।

न बातों का रखें ध्यान
– ओवेरियन कैंसर होने की संभावना उनमें अधिक होती है जो हॉर्मोनल थेरेपी ले रहे होते हैं। एस्ट्रोजन का स्तर अधिक होने पर भी खतरा बढ़ जाता है।
– ब्रेस्ट कैंसर का प्रमुख कारण जेनेटिक म्यूटेशन, फीडिंग न कराना, 35 की उम्र के बाद बच्चे होना। यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि ब्रेस्ट की हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर नहीं होती।
– सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए असुरक्षित यौन संबंध से बचें। 30 साल की उम्र के बाद हर तीन साल के अंतराल पर और 45 साल की उम्र के बाद हर एक साल के अंतर पर पैप स्मीयर टेस्ट करवाते रहें।

इनका रखें ध्यान
– नियमित जांच
– नियमित एक्सरसाइज
– पौष्टिक आहार में हाई प्रोटीन और लो कैलोरी डाइट का सेवन
– वैक्सिनेशन

कैंसर होने की बड़े कारण
– बेटियों की देर से शादी होना
– शादी के बाद देर से बच्चे होना
– हॉर्मोन लेवल बढ़ना
– मल्टीपल पार्टनर के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना
– पीरियड्स में अनियमितता
– अधिक धूम्रपान
– ब्रेस्ट में गांठ होना
– ब्रेस्ट के आकार में बदलाव
– निपल में रिसाव होना या रंग बदलना

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