देहरादून में तनाव: निहंगों को नहीं पता थे रास्ते, पर राह भटक गया पुलिस-प्रशासन, कहां गए कोई नहीं जानता

निहंगों के शहर की ओर बढ़ने की सूचना के बाद पुलिस ने प्रेमनगर को केंद्र बनाकर सुरक्षा घेरा तैयार किया, लेकिन मूवमेंट की सही दिशा का पता लगाने में सिस्टम पीछे रह गया। कई रास्तों के बीच पुलिस की उलझ गई और अब इस पूरे मामले में इंटेलिजेंस इनपुट व सुरक्षा प्लानिंग पर सवाल उठ रहे हैं।पंजाब, हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड आने वाले निहंग सिखों को शायद देहरादून के रास्ते नहीं पता थे लेकिन यहां तो पुलिस और प्रशासन ही राह भटक गया। विकासनगर की ओर से आ रहे निहंग किस रास्ते से निकल गए ये पुलिस को पता ही नहीं चला। बस इतना था कि बैरियर तोड़कर प्रेमनगर आ रहे हैं तो पुलिस ने प्रेमनगर को छावनी बना दिया। जबकि, विकासनगर से प्रेमनगर जाने के एक नहीं बल्कि कई रास्ते हैं। इन्हीं रास्तों की भूल भुलैया में निहंग सिख तो निकल गए लेकिन देहरादून पुलिस गुम हो गई।दिनभर पांवटा साहिब गुरुद्वारे में चली मैराथन बैठक के बाद कुछ निहंग चकमा देते हुए देहरादून की ओर बढ़ गए हैं। पुलिस को जानकारी मिली कि निहंग प्रेमनगर की ओर जा रहे हैं। सूचना पर पूरे जिले की फोर्स प्रेगनगर क्षेत्र में तैनात कर दी गई। बैरिकेडिंग लगाकर यहां अधिकारियों के साथ चेकिंग की गई।कुछ इक्का दुक्का लोग आए आए तो उन्हें निकाल दिया गया। इस बीच पता चला कि निहंगों के कुछ लोगों को झाझरा तक पुलिस ने ट्रैक किया है। बस इतनी ही जानकारी थी कि झाझरा तक निहंग आए हैं। प्रेमनगर में खड़ी पुलिस और प्रशासन की टीम यहां शिथिल पड़ गई। अब निहंग कहां गए ये किसी को नहीं पता।दूसरे रास्ते पर नया गांव तक पुलिस ने बैरियर लगाए गए थे। नया गांव में भी कोई निहंग नहीं आए। नया गांव आए नहीं प्रेमनगर पहुंचे नहीं तो निहंग गए कहां यह जानकारी पुलिस को देर रात तक नहीं लगी। दरअसल, विकासनगर से प्रेमनगर या देहरादून शहर पहुंचने के दो रास्ते तो प्रमुख हैं लेकिन इसके अलावा भी यहां कई रास्ते ऐसे हैं जहां कोई भी गांवों के रास्ते आ सकता है। नया हाईवे जहां तक आता है वहां से भी कई रास्ते शहर के लिए कटते हैं। पुलिस निहंगों को मुख्य मार्गों पर ढूंढती रही और ये अनजान निहंग पुलिस को उन्हीं के जाने पहचाने रास्तों पर चकमा देकर निकल गए।



