उच्च हिमालयी भूरे भालू ने काले भालू के क्षेत्र में बनाया ठिकाना, हाइबरनेशन की अवधि कम होना वजह

न्यजीव संस्थान के अध्ययन में सामने आया है कि उच्च हिमालयी भूरा भालू अब काले भालू के पारंपरिक आवास में रहने लगा है, जिसकी बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन और भोजन की कमी मानी जा रही है।उच्च हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाले भूरे भालू ने अब काले भालू के इलाके में ठिकाना बना लिया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। दोनों भालू प्रजातियां आपसी संघर्ष से बचने के लिए खुद को ढाल रही हैं।उत्तराखंड और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों में भालू की तीन प्रजातियां मिलती हैं। तराई क्षेत्र में स्लोथ बियर, 1800 से 3000 मीटर पर काला भालू पाया जाता है। वहीं, 2800 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर भूरा भालू का वास स्थल होता है। अब भूरा भालू नीचे आकर काले भालू के वास स्थल में पहुंच गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के रिसर्च स्कॉलर अमरपाल सिंह ने बताया कि यह बदलाव ग्रेट हिमालय और पीर पंजाल क्षेत्र से जुड़ा है। संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक सत्यकुमार को स्थानीय लोगों ने दोनों भालुओं के साथ रहने की बात बताई थी। इसके बाद 3 अगस्त, 2023 को अध्ययन शुरू किया गया। ललित कुमार शर्मा और साल्वाडोर के निर्देशन में जेडएसआई के सहयोग से यह अध्ययन हुआ।रिसर्च स्कॉलर अमरपाल सिंह के अनुसार, भूरा और काला भालू एक साथ रह रहे हैं। दोनों प्रजातियां आपसी संघर्ष से बचने की कोशिश करती हैं। मसलन, जब भूरा भालू भोजन की तलाश में निकलता है, तब काला भालू बाहर नहीं आता। वे बांज समेत अन्य मिश्रित और शंकुधारी वनों का इस्तेमाल करते हैं। प्री विंटर के समय भूरा भालू अपने ऊंचे इलाके में लौट जाता है, फिर अप्रैल-मई में वापस काले भालू के क्षेत्र में आता है।



