अब बिजली चोरी, मीटर तोड़ने पर एक लाख तक का जुर्माना, आयोग ने लागू किया जन विश्वास अधिनियम

उत्तराखंड में बिजली चोरी करने और मीटर या यूपीसीएल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर अब पहले से ज्यादा सख्ती होगी। विद्युत नियामक आयोग ने जन विश्वास अधिनियम लागू करते हुए ऐसे मामलों में जुर्माने की सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये तक कर दी है।उत्तराखंड में अब बिजली चोरी, मीटर तोड़ने, यूपीसीएल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। केंद्र सरकार के जन विश्वास अधिनियम को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में भी लागू कर दिया है। इसके तहत कई अहम बदलाव लागू किए गए हैं।
इस अधिनियम के तहत विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सामग्री को लापरवाही से तोड़ने या नुकसान पहुंचाने, बिजली चोरी पर (धारा 139 के तहत) अब 5,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोबारा दोषी पाए जाने पर भी यही जुर्माना लागू होगा। पहले ये 10 हजार रुपये तक था।आयोग की ओर से जारी आदेशों या निर्देशों का पालन न करने पर धारा 142 के तहत जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपये से पांच लाख रुपये तक कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अन्य मामलों में यह जुर्माना 1,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच हो सकता है। यह जुर्माना सभी हितधारकों पर लागू होगा।इसमें धारा 146 में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत नियमों के उल्लंघन के मामलों में अब कारावास के प्रावधान को हटाकर जुर्माने को अधिक स्पष्ट किया गया है, जो 10,000 रुपये से शुरू होकर 10 लाख रुपये तक हो सकता है। छोटे उल्लंघनों के लिए जुर्माना 1,000 रुपये से 50,000 रुपये तक तय किया गया है।




