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धार की भोजशाला में क्या है विवाद की जड़? जानिए इतिहास से हाईकोर्ट तक की पूरी कहानी

धार की भोजशाला को लेकर विवाद आखिर क्यों है? इस स्थल का इतिहास क्या कहता है? हिंदू और मुस्लिम पक्ष कब-कब आमने-सामने आए? यह मामला राजनीति का बड़ा मुद्दा कैसे बना? एएसआई की रिपोर्ट में क्या सामने आया और कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ? आइए आसान भाषा में समझते हैं भोजशाला विवाद की पूरी कहानी…मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर आज 15 मई को बड़ा फैसला आ सकता है। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच इस मामले से जुड़ी छह याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने भी सोशल मीडिया के जरिए फैसले की जानकारी साझा की है।यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था। फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सभी पक्षों ने शांति बनाए रखने की अपील की है।भोजशाला विवाद का नया कानूनी अध्याय साल 2022 में शुरू हुआ। उस समय रंजना अग्निहोत्री और उनके सहयोगियों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को वहां पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने एएसआई को पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से 98 दिनों तक परिसर का सर्वे किया और 15 जुलाई 2024 को 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की।

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